Saturday, February 7, 2009

ख्वाइशें

जितना तुम्हे जानती हु.....
उतना ही तुम्हे पाने की ख्वाइश बढती जाती है......
पर ख्वाइशों का क्या है..... कोई अंत ही नही है.....
कल तक सिर्फ़ तुमसे बात करना चाहती थी.....
बात हुई तो तुमसे मुलाकात की ख्वाइश हुई....
एक मुलाकात हुई तो बार- बार मिलने की ख्वाइश हुई.....
हर ख्वाइश पूरी होने के बाद एक नई ख्वाइश हुई......

जानती हु न मिल सकोगे मुझे .....
पर ख्वाइशों का क्या करू???

क्यूँ मन उसी की ख्वाइश करता है....... जो मिल नही सकता....?
क्यूँ तमन्नाये पूरी होने से पहले ही दम तोड़ देती है....?????
इसी क्यूँ का जवाब धुन्दती मैं.........

15 comments:

रश्मि प्रभा said...

ख्वाहिशों के पंख होते हैं, लम्बी उड़ान होती है,
कई ख्वाहिशें अधूरी रह जाती हैं.......
इतने गहरे भावों को सहजता से लिखा है , बहुत बढिया

Dr. RAMJI GIRI said...

ख्वाहिशें है तभी लगता है कि जिजीविषा है... इनके होने पर प्रश्न क्यों !!! मंजिल निगाह में ना हो तब भी यात्रा खुशनुमा तो हो ही सकती है,.,.

Upinder Dhami said...

khavaishe puri karne ke liye hi hoti ha.agar mehnat lagan or imaandari se lage raho to sari khavaishe na sahi par bohat sari puri zaroor hoti ha

sakhi with feelings said...

insaan ki khawhise agar kahatm hui to bacha kya bhala???

acha likha hai

sakhi

sangeeta said...

jyon hi koi khwaahish puri hoti hai ek nayi khwaahish janm leti hai...kyon ki khwaahish kabhi marati nahi aue khwaab kabhi pure hote nahi...
god bless u

राजीव करूणानिधि said...

बहुत ही सुन्दर रचना लगी आपकी. बधाई इसके लिए.

bhootnath( भूतनाथ) said...

ख्वाब को ख्वाब ही बना रहने दो.....
ख्वाब कोई आग ना बन जाए कहीं !!
आग के जलते ही तुम बुझा दो इसे
सब कुछ ही ख़ाक ना हो जाए कहीं !!
अपने मन को कहीं संभाल कर रख
तेरे दामन में दाग ना हो जाए कहीं !!
तेरी जानिब इसलिए मैं नहीं आता !!
मेरी नज़रें तुझमें ही खो जाए ना कहीं !!
खामोशी से इक ग़ज़ल कह गया"गाफिल"
इसके मतलब कुछ और हो जाए ना कहीं !!

विनय said...

बहुत सुन्दर कविता लिखी है

vinaykaushal said...

जितना तुम्हे जानती हु.....
उतना ही तुम्हे पाने की ख्वाइश बढती जाती है......
Kya Khoob Likya Hai

manas bharadwaj said...

bahut hii acha likha hai .....

mann par chaa gayii panktiyaan ....

amarjeet kaunke said...

khwahishen hi to mnushya k jine ka bahana hai...inka tutna pura hona hi zindgi hai...beautiful poem in very simple words.....dr.amarjeet kaunke

हितेंद्र कुमार गुप्ता said...

bahut barhia... isi tarah likhte rahiye.... magar likhiye...jaaree rakhiye

http://hellomithilaa.blogspot.com
mithilak gap maithili me

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manpasand gaane

http://muskuraahat.blogspot.com
Aapke bheje photo

masoomshayer said...

kahs tour par ache ehai ye rachana bahut khoon

संजय भास्कर said...

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Rohit Jain said...

khwahishein toot jaayein to taqleef to hoti hai per dil mein nayee khwahishon ke vaaste dher sari jagah jaroor nikal aati hai, aur gunjaish paida ho jati hai nayee khwahishon ki....Achchhi rachna ke liye shukriya..