Friday, February 5, 2010

काश एक इमरोज.........

काश एक इमरोज मेरी भी ज़िन्दगी में होता......
तो जीने का फलसफा ही कुछ और होता,
मैं चलती, मेरे संग संग चलता वो......
जो रूकती, तो पल भर को ठहर जाता वो भी,
हर अश्रु को मोती बना देता वो.....
जो रोती तो पल भर को सहम जाता वो भी,
मैं हंसती खिलखिला उठता वो......
जो मुस्कुराती तो अपने गम में भी मुस्कुरा उठता वो भी,
मेरी हर हार को जीत बना देता वो......
मेरी जीत के लिए जीती बाजी हार जाता वो भी,
मेरी धुन में गूँज उठता वो........
जो गाती मैं तो संग संग गुनगुना उठता वो भी,
मैं झूमती तो नाच उठता वो........
जो गिरती मैं तो चलते चलते लड़खड़ा जाता वो भी,
जो मरती तो मुझे अमर कर जाता वो,
मेरे मरने के बाद भी अपनी कलम से मुझे जिवंत कर जाता वो.........
काश एक इमरोज.........


13 comments:

रश्मि प्रभा... said...

kaash ! is khwaahish ki tapish har dil me hai,par jis sanche mein imroz bana,wah sancha kahin nahin hai

ρяєєтι said...

kaash... aajkal hum bhi yahi sochte rahte hai... per wahi baat wo to ek hi they , hai aur rahenge... saancha god ji ne tod diya...

sangeeta swarup said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति.....काश ऐसा होता....

neelam said...

oye hoe ,meri line par poori kavita ,bahut achchi really nice touch .

love grows only in love
by imroj

Archit said...

kash bas kash hi hota hai..use banaya jata hai..

शशि "सागर" said...

waaaaaah
bahut hee sundar...
aapki rachanaaon k dwaara do baaten saamane aatee hai...1. imroj saahab k prati aapkaa sneh 2. aapkee aakaankshaa.
bahut acchaa lagaa aapke bhaawon ko padh kar.
duaa hai khudaa aapki tamannaaon ko poori karen.

Apanatva said...

bahut sunder shavdo me bhavo kee abhivykti..............

Shekhar Suman said...

bahut achhe se wyakt kiya hai aapne....
kaash aisa ho pata....
http://i555.blogspot.com/

Mukesh Kumar Sinha said...

bahut khubsurat abhivyakti.........!! kash!!.......:)

raj said...

सुंदर रचना........

http://rajdarbaar.blogspot.com

बादल१०२ said...

bahut sunder rachna,verry touching

Rajey Sha said...

c shiv kumar batalvi poems,gazal, songs in hindi language. rajey.blogspot.com

शारदा अरोरा said...

कविता सुन्दर है , पर इमरोज़ की चाहत करने से पहले हमें खुद अमृता बनना पड़ेगा , हर दिल वही चाहता है और वही मांगता है , इसी को मन कितनी ही रूप रेखाओं में व्यक्त करता रहता है ।