Wednesday, September 24, 2008

तलाश

भटक रही हूँ मैं सहारे की तलाश में .......
नदी सी बह रही हूँ, किनारे की आस में........
खो रही हूँ अँधेरे में..........
रौशनी की तलाश में.......
खुद में ही उलझी हुई हूँ........
खुद की तलाश में............

9 comments:

VIJAY said...

तलाश में इसके बारे में लिखना तो बहुत चाहता हु और मेरे अन्दर बहुत कुछ है
लिखने के लिए लेकिन कहते है न हर किसी को भगवान लिखने की कला नहीं देता
में लिखना तो चाहता हु लेकिन शब्द नहीं मिल पा रहे है,में उन शब्दों की तलाश में हु,
में तलाश में जो तुने लिखा है उसकी तारीफ करने के लिए उन शब्दों की तलाश में हु,में तलाश में तुजे और उत्साहित करने के लिए,की तू और लिखती रहे,,,,,,,जोकर

Dr. RAMJI GIRI said...

"नदी सी बह रही हूँ, किनारे की आस में........
खो रही हूँ अँधेरे में..........
रौशनी की तलाश में......."

यथार्थ जीवन दर्शन है इन पंक्तियों में...
सुन्दर शब्द-विन्यास है...
****कभी उजास भरे दिन में स्याह लम्हों की तलाश की है आपने !!!!!!!!!!!!!!

रश्मि प्रभा said...

tamam umra talaash me bit jaati hai.....
kaun hun? kya uddeshya hai aane ka,
isi ki khoj.........
ye kshanika bahut bhaw liye hue hai

Vijay Kumar Sappatti said...

खुद में ही उलझी हुई हूँ........
खुद की तलाश में............

Dear Rani,

these lines are wonderful and carry the meaning of self and innerself. several meanings comes out from these lines . very good rani.. keep it up...

regards

vijay

Akshaya-mann said...

in chand pankhtiyo mai kuch aisa lagta hai jaise poori zindagi bayan kar di ho..
sabhi kuch na kuch talashte hain koi unsuljhe sawal to koi apni phechan........
bahut sundar likha hai aapne.......

EHSAAS said...

bahut khubsurat jazbaat hain aur utnee hi khubsurtee se aapne shabdon main piroya hai.....!

khubsurat kavita!

...Ehsaas!

manas bharadwaj said...

kitne kam shabdhonme kitna jyada kehna jaanti hain aap ..............


bahut umda likha hai

keep it up

श्रद्धा जैन said...

mujhe lagta hai ki talash hi zindgi hai
kabhi khatam nahi hoti
kuch apni si soch

"Azad Sikander" said...

jab tak sans hai tab tak aash hai,
jaha chah hai waha raha hai,