Thursday, September 18, 2008

PYAR

" क्या कभी प्यार भी पूरा होता है, जिसका पहला अक्षर ही अधूरा होता है"सोचा, चलो इस बात को झूट साबित करते है!बहुत कोशिश की पर प्यार नहीं हुआ......क्या करती..............कहा छोडो.......फिर एक दिन पता चला कि मुझे प्यार हो गया है!कब हुआ! पता नहीं! पर हो गया था,सोचा अच्छा ही हुआ, अब इस कहावत को झुठला दूंगी......सब कुछ नया नया सो था.... अलग अलग सो.....कभी न हुआ वो एहसास था........खुली आँखों से देखा हुआ ख्वाब था.......मन हर वक़्त सुंदर सपने बुनता था,ख्वाबों कि दुनिया कितनी हसीन होती है, ये तब ही जाना.....प्यार क्या होता है ये भी तब जाना!ये वो आइना है जिसमे आप खुद दो और सिर्फ खुद को ही देखना चाहते है, परपर एक हलकी सी ठोकर उस आईने को तोड़ भी देती है.....अब ये मान चुकी हूँ कि किस्मत को मात देना आसन नहीं......क्यूंकि सचमुच "प्यार" का पहला अक्षर अधूरा होता है......अधूरा है तब तक ही सही है.......पूरा होते ही (पयार) ये गलत हो जाता है........

4 comments:

रश्मि प्रभा said...

सबसे पहले ब्लॉग बनाने की बधाई.......
प्यार,
ये एक नशा है,आधा-अधुरा है
पर नशा है
ज़िन्दगी के हसीन पल यहीं से शुरू होते हैं
कभी गम देता है,कभी ख़ुशी देता है,
बहुत ही सरल और सधे शब्दों से इस प्यार को सजाया है
जो बिना किसी परेशानी के दिल में समाया है.........

rajesh ranjan said...

aapka blog dekha. sundar ehsason se saja hua hai. kuch pyar ke ful lagatar jorte rahiye. mera manna hai ki pyar talash se nahi kismat se uplabdh hota hai. har koi khushkismat nahi hota. behtar hai ki pyar na mile par agar mile to kabhi dur na ho. bahut pira hoti hai.

chotu said...

hi,
apka blog pada mujhe apna pyar yaad aa gaya. career ko bachane main mujhe meri pyar ki kasti chut gayi, usse lagta hai maine usse dhokha diya hai, lekin mujhe khushi hai aj wo khush hai mujhe lagta hai hum dono ek dusre ke bin nahi rah sakunga. but i still lov her.

hope said...

"RANI"........kitne karib se dekha he tumne jindgi ko,tumhari sari umra bhi kam lagti he hame ek-ek pankti ki anubhuti aur anubhvon ke liye..............jvalant aur jijeavisha ki prateati....tumhe kaise he? sach me tum hamara yakshh prashn lagte ho......dhhanya he aapki lekhni ke lakshya ko....parampita tumhe "VAH" de,jise paane ke baad kuchh bhi paana shesh na rah jaye....naman tumhare chintan ko......